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नामरूप उर्वरक परिसर, तत्कालीन हिंदुस्तान फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन लिमिटेड से द्विभाजन के बाद 1 अप्रैल , 2002 के प्रभाव से ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन लिमिटेड नामकरण किया गया ,  जो असम के डिब्रूगढ़ जिले के दक्षिण-पश्चिमी सीमा में नदी दिल्ली के तट पर स्थित है।  यह भारतवर्ष में अपनी तरह का पहला कारखाना है जो नाइट्रोजन उर्वरक के उत्पाटन के लिए बुनियादी कच्चे माल के रूप में संबद्ध प्राकृतिक गैस  का उपयोग करता है।

साठ के दशक की शुरुआत तक, नामरूप एक सुषुप्त ग्राम के रूप में था , जिसके बारे में  देश के अन्य भाग के लोगों को बहुत कम जानकारी थी । नाहरकटिया क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज ने गैस के समुचित उपयोग के लिए गम्भीर चिंतन को प्रोन्नत किया जो अन्यथा बेकार में जला दिया  जाता था ।

अमेरिका के मेसर्स स्नोदग्रास एसोसियट  की सिफ़ारिश के परिणामस्वरूप,  जिसमें इस प्रच्छन्न कोष  की उपयोग से रासायनिक उर्वरकों और बिजली उत्पादन करने के सुझाव गिया गया था,  , तत्कालीन   खान एवं  ईधन मंत्रालय ने  श्री एस.एस. खेड़ा, आई सी एस की अध्यक्षता में  एक समिति नियुक्त की और इस समिति की व्यापक सिफ़ारिश के आधार पर डॉ जी पी काने  की अध्यक्षता में गठित एक तकनीकी समिति ने असम में प्राकृतिक गैस  से एक उर्वरक कारख़ाना  स्थापित करने की संभावना के बारे में पुन:  अध्ययन किया , जबकि केंद्रीय जल एवं शक्ति  आयोग को  एक बिजली परियोजना स्थापित करने की सम्भावना को पता लगाने का दायित्व दिया  गया ।

विस्तृत तकनीकी-आर्थिक अध्ययन करने के बाद काने  समिति ने  नामरूप में एक उर्वरक कारख़ाना स्थापित करने की सिफ़ारिश की।   केंद्रीय जल एवं शक्ति  आयोग ने नामरूप उर्वरक कारख़ाना से  कम ही दूरी पर एक ताप बिजली कारख़ाना स्थापित करने की सिफ़ारिश की ।

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