कॉर्पोरेट प्रोफाईल

शुभारम्भ नामरूप I

सन 1960 के मध्यभाग में नामरूप I संयंत्रों समुह के परियोजना के लिए हिंदुस्तान केमिकल्स एंड  फर्टिलाइजरस, जो 1 जनवरी, 1961 में फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन अफ ईंडिया में सन्मिलित हुआ ,  द्वारा योजना शुरूआत की गयी थी। विभिन्न बाधाओं को सफलतापूर्वक पार  करने के बाद पहला जनवरी, 1966 को असम के तबक़े  मुख्यमंत्री स्व. बी पी चलिहाजी  द्वारा नामरूप I  कारख़ाना का नींव रखा गया ।  अगस्त, 1968 में कारख़ाना पूर्ण रूप में चलने लगा । पहला जनवरी, 1969 में कारख़ाना के व्यावसायिक उत्पाटन घोषित  किया गया  । नामरूप I  का वार्षिक उत्पाटन क्षमता था 55000 में.टन यूरिया और 10000 में. टन ऑमोनियम सालफेट और इसमें  लागत पूंजी ` 6.36 करोड़ विदेशी मुद्रा सहित  ` 24.96 करोड़ था ।      

 विस्तार – नामरूप II

नामरूप – 1 के संचालन सफल रूप से चलने के समय यह देखा गया कि ऑयल इंडिया के निकटवर्ती मोरान – नाहरकटिया   तेल क्षेत्र में काफी मात्रा में प्राकृतिक गैस है । भारत सरकार ने इस समूहित  प्राकृतिक गैस के लाभदायक उपयोगिता के लिए नामरूप द्वितीय इकाई स्थापना की निर्णय ली जिसमें पुंजी निवेश रू .23.60 करोड़ की विदेशी मुद्रा सहित 74.60 करोड़ रुपये था।

1976 में नामरूप द्वितीय इकाई का  व्यावसायिक उत्पाटन यूरिया की 3,30,000 मीट्रिक टन की वार्षिक क्षमता के साथ शुरू हुआ ।

विवर्धन : नामरूप III

मोरान – नाहरकटिया   एवं लाकुवा तेल क्षेत्र में प्रचुर प्राकृतिक गैस के उपलब्धता से नामरूप तृतीय इकाई की स्थापना की संयोजना की जिसमें रू .58.67 करोड़ की विदेशी मुद्रा सहित लागत पुंजी 285.55 करोड़ रुपये था । नामरूप तृतीय इकाई का व्यावसायिक उत्पाटन वार्षिक क्षमता 3,85,,000 में. टन यूरिया से 1987 सन में  शुरू हुआ ।

 

 

कायाकल्प:

डिज़ाइन सम्बंधित हार्डवेयर / उपकरण समस्याओं के लिए लगातार नुकशान होने के कारण इकाईयों के निष्पादन में सुधार की आवश्यकता थी । सन 1994 से नामरूप II इकाई बंध पड़ी थी जिसमें काफी अधिक मरम्मत तथा कुछ उपकरणों के प्रतिस्थापन ज़रूरी थी । नामरूप I और नामरूप III ठीकठाक चल रहे थे पर इनके निष्पादन में भी उन्नति करण ज़रूरी थी ।

संयंत्रो के निष्पादन तथा उपकरणों के बिगाड़ के ऐतिहासिक ऑकड़े के आधार पर पुनर्गठन योजना का अंतिम रूप दे दिया गया । योजना को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न सरकारी समितियों और भी इंजीनियरिंग ठेकेदार द्वारा की गई संयंत्र सुधार अध्ययन रिपोर्टों को भी अध्ययन किया गया।

सुधार योजना का उद्देश्य एक निश्चित अवधि और समग्र परियोजना लागत अनुमान के अंदर इकाई के आर्थिक संचालन के लिए संयंत्र के प्रदर्शन के कुछ न्यूनतम स्तर को प्राप्त करना था ।

इस तरह परामर्श सेवाओं के एक प्रमुख एजेंसी तथा भारत सरकार का उपक्रम, प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (पीडीआईएल), को , नामरूप संयत्रों  के सुधार के लिए लिए एकक बिंदु जिम्मेदारी सहित परामर्शों के मुख्य ठेकेदार के रूप में नियुक्त किया गया । पीडीआईएल मूल डिजाइन और प्रमुख क्षेत्रों में इंजीनियरिंग के संबंध में अपनी सहयोगी लाइसेंसधारी  HTAS, SNAM PROGETTI और GV से प्रमुख क्षेत्रों में ज़रूरी बुनियादी डिज़ाइन  तथा अभियांत्रिक के मुद्दे पर मदद ली । एचएफसीएल (अब बीवीएफसीएल) और पीडीआईएल के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए और अनुबंध की प्रभावी तिथि 2 नवम्बर, 1998 को निर्धारित की गयी ।

कायाकल्प के बाद

पौधा वार्षिक क्षमता
नामरूप -मैं अमोनिया का 39,600 मीट्रिक टन
नामरूप -II यूरिया की 2,40,000 मीट्रिक टन
अमोनिया की 1,44,000 मीट्रिक टन
नामरूप -III यूरिया की 3,15,000 मीट्रिक टन
अमोनिया की 1,67,400 मीट्रिक टन
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